15 अगस्त 1947 को भारत में एक नया युद्ध आरम्भ हुआ, वर्चस्व का युद्ध | आज लोग धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं लेकिन इसका अर्थ नहीं समझते | धर्मनिरपेक्षता का अर्थ होता है “धार्मिक संस्थानों से राज्य के अलग होने का सिद्धांत “| लेकिन आज मुस्लमान के पास शरिया-आधारित मुस्लिम पर्सनल लॉ है, जबकि हिंदू, ईसाई और सिख भारतीय आम कानून के तहत रहते हैं। हर भारतीय कि एक नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वो भारत के सही इतिहास का सार्वजानिक प्रचार करे |

धर्मनिरपेक्षता के नाम पर जातिवाद आरक्षण छलावरण का सबसे बड़ा प्रमाण है

मोहनदास और नेहरू की राजनीती आप सब जानते हैं कि कैसे दोनों ने मिल कर 1938 में नेताजी बोसे और 1946 में सरदार पटेल को बाहर का रास्ता दिखाया | इन सत्ता धारियों का उद्देश्य इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि आज़ादी के बाद भारत की सभ्यता को ना सिर्फ दरकिनर कर अंग्रेजी सभ्यता को अपनाया अपितु अंग्रेजी नाम को भी नहीं बदला | ये तो राष्ट्र की बात थी लेकिन क्या आपने कभी विचार किया की नेहरू की पुत्री इंदिरा प्रियदर्शिनी नेहरू जिसने फ़िरोज़ जहांगीर खान या घंडी (Feroze Jehangir Ghandy) से विवाह किया और बच्चों को उनके पिता का नाम नहीं दिया | आश्चर्यजनक!!

इसी महिला ने योजनाबद्ध पैंतरों से 2 नवंबर 1976 को लोकसभा और 11 नवंबर 1976 को राज्य सभा द्वारा एक विधेयक पारित किया गया था। राज्यों द्वारा अनुसमर्थन के बाद विधेयक को 18 दिसंबर 1976 को तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद से मंजूरी मिली और उसी दिन वो भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया गया। ये इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस सरकार द्वारा आपातकाल (25 जून 1975 – 21 मार्च 1977) के दौरान लागू किया गया, क्यों ??

सच कड़वा होता है और सच बहने लगा था

भारत के संविधान में 42 वां संशोधन, जिसे आधिकारिक रूप से संविधान (चालीसवां संशोधन) अधिनियम, 1976 के रूप में जाना जाता है | जिनके उद्देश्यों में राष्ट्र हित कम विरोध ज़्यादा है | पहला उद्देश्य : संशोधन ने अदालतों के दायरे से चुनावी विवादों को हटा दिया |
दूसरा उद्देश्य : संशोधन ने भारत के संघीय ढांचे को ध्वस्त करते हुए राज्य सरकारों से केंद्र सरकार को अधिक शक्ति हस्तांतरित करना |
तीसरा उद्देश्य : संसद को संविधान के किसी भी हिस्से में बिना न्यायिक समीक्षा के संशोधन करने के लिए अनर्गल शक्ति देना था।
चौथा उद्देश्य : सुप्रीम कोर्ट द्वारा किसी भी प्रमुख कानून की जांच से एक प्रमुख प्रिंसिपल प्रतिरक्षा के अनुसरण में पारित करना था। जिससे कई मामलों के संबंध में संसद की नीति को विफल करना अदालत के लिए मुश्किल होगा।

आज धर्मनिरपेक्षता की बात करने वाले उन तमाम जिहादियों को क्यों भूल जाते हैं जिन्होंने भारत में धर्म के नाम पैर कत्लेआम किया | हमारे गुरुकुल, पुस्तकालय, धर्मस्थलों को सिर्फ धर्म के नाम पर जला दिया | क्यों उस औरंगज़ेब को राष्ट्रिय संग्राहलय में जगह दी गयी है जिसने न जाने कितने भारतीयों का खून बहाया है | भारतीय शौर्य की एक प्रेरणादायक घटना जो बच्चों से छुपाई गयी |

गुरु गोविन्द सिंहजी के 4 पुत्र थे साहेबज़ादा अजित सिंह , साहेबज़ादा जुझार सिंह, साहेबज़ादा जोराबर सिंह और साहबज़ादा फ़तेह सिंह जिनकी उम्र 1705 में क्रमशः 18, 14, 9, 6 थी | 1705 में वजीर खान (असली नाम मिर्जा अस्करी) सरहिंद का गवर्नर था, जो सतलुज और यमुना नदियों के बीच औरंगज़ेब के अधीन मुग़ल साम्राज्य के एक क्षेत्र का प्रशासन करता था | उसने साहेबज़ादा जोराबर सिंह उम्र 9 वर्ष और साहबज़ादा फ़तेह सिंह उम्र ६ वर्ष को कहा इस्लाम कबूल कर लो और हम तुम्हें ज़िंदा छोड़ देंगे लेकिन दोनों साहिबज़ादों ने सर झुकाने से इंकार कर दिया और उस हत्यारे ने उन्हें ज़िंदा दिवार में चुनवा दिया |

मेरे विचार में धर्मनिरपेक्षता की बात वो करते हैं जो स्वयं धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं | मैं गर्व से कहता हूँ अपने आपको भारतीय और एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र में सिर्फ राष्ट्र सर्वोपरि होता है और इसलिए प्रत्येक भारतीय की ये नैतिक ज़िम्मेदारी है इन सम्मानों की रक्षा करना | जो राष्ट्रीय सम्मान के प्रतीकों का अपमान करेगा वो मार खायेगा ये एक संवैधानिक अधिकार होना चाहिए | देश के सम्मान में जो व्यक्ति 52 सेकंड खड़ा नहीं रह सकता वो धर्मनिरपेक्षता की बात करता है| भारत की परम्परा एक बहुत बड़ा नाम है राजा दाहिरसेन | कभी पूछिए अपने secular दोस्तों से पूछिए और सुनिए उनका जवाब |

राजा दाहिरसेन

राजा दाहिरसेन जिन्होंने अलीसाहब के वंशजों को पनाह दी थी और उनकी रक्षा के लिए अपने प्राण दे दिए | अली साहब जो प्रोफेट मोहम्मद के दामाद थे जिनकी हत्या मस्जिद में फज्र की नवाज अदा करते समय कर दी गयी | उनके बच्चे की कर्बला में हत्या कर दी गयी | जो भाग कर राजा दाहिरसेन की शरण में गए करने उनकी हत्या के लिए उमय्यद खिलाफत ने मुहम्मद बिन कासिम को सिंध पर हमला करने का आदेश दिया और राजा ने आखिर साँस तक उनकी रक्षा की | प्रोफेट मुहम्मद के वारिसों का हत्यारा मुहम्मद बिन कासिम पकिस्तान का हीरो है ना की राजा दाहिरसेन जिन्होंने उनकी रक्षा की | मोहनदस ने तीन बन्दर मुझे श्रीकृष्णा की सीख “अधर्म के सामने मूक रहने से उत्तम है प्राण त्यागना” के विरोधी लगते हैं और एक योजना का हिस्सा भी |गर्व से कहो भारतीय |

हतो वा प्राप्यसि स्वर्गम्, जित्वा वा भोक्ष्यसे महिम्।
तस्मात् उत्तिष्ठ कौन्तेय युद्धाय कृतनिश्चय:॥

(द्वितीय अध्याय, श्लोक 37)

इस श्लोक का अर्थ है: यदि तुम (अर्जुन) युद्ध में वीरगति को प्राप्त होते हो तो तुम्हें स्वर्ग मिलेगा और यदि विजयी होते हो तो धरती का सुख को भोगोगे… इसलिए उठो, हे कौन्तेय (अर्जुन), और निश्चय करके युद्ध करो।

जयहिन्द!!


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