इतिहास सदैव ही प्रेरणा दायक होता है |

फिर चाहे वह सामाजिक रूप से अनुकूल रहा हो या प्रतिकूल प्रत्येक व्यक्ति सदैव ही उससे सीखता रहता है और आगे बढ़ता है | जीवन, समय चक्र की तरह अपनी गति से आगे की ओर बढ़ता है और अपने आपको विकसित करता रहता है जिसका सबसे बड़ा उद्धरण है ‘प्रौद्योगिकी’ जिसने आज सुचना संचार में सभी सीमाओं को समाप्त कर दुनिया को आधुनिक बना दिया है | प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्रथम गुरु उसके माता-पिता होते हैं जिनका लक्ष्य अपनी संतान को उत्तम बनाना होता था अपितु आज के आधुनिक युग मैं शिक्षा की परिभाषा बदल गयी है और आज प्रत्येक व्यक्ति अपनी संतान को श्रेष्ठ बनाना चाहता है | यह सही मार्ग नहीं हैं क्यूँकि एक उत्तम व्यक्ति हमेशा ही श्रेष्ठ होता हैं किन्तु श्रेष्ठ व्यक्ति उत्तम हो ये अनिवार्य नहीं हैं क्यूँकि यदि श्रेष्ठ व्यक्ति उत्तम होता तो आज संसार में भ्रष्टाचार न होता |

मैंने जब भी किसी शहर में किसी से पूछा कि यंहा बड़ा आदमी कौन है ?? तो लोगों ने एक-दो नाम बता दिए और जब मैंने पूछा कि वो क्यों है?? तो सब ने कहा कि आपको पता उसके पास कितना पैसा है!!| यदि आप भी इस बात से सहमत हैं तो खबरदार आगे की जानकारी आपके लिए हानिकारक हो सकती है क्यूंकि हमे सच बोलने की आदत है और सच कड़वा होता है लेकिन नए भारत के लिए इतिहास को सही लिखने कि ज़रुरत है | यदि आप चाहें तो मुझे अदालत बुला सकते हैं |

हमे पढ़ाये गए इतिहास का सबसे बड़ा झूठ है “India की खोज”
इतिहास कहता है कि वास्कोडिगामा नाम का एक पुतर्गाली दुनिया की खोज करने निकला और 20 मई 1498 को भारत आया जिसका नाम पड़ा इंडिया |यही है झूठ का बीज क्यूँकि यँहा से सत्य को भुला दिया जाता है और एक कहानी आरंम्भ होती है |

इतिहास एक पहेली है और हम इसे सुलझा कर दुनिया को भारत का इतिहास बताएँगे| दुनिया के हर देश का एक इतिहास है लेकिन हमारा इतिहास हमें कभी पढ़ाया ही नहीं गया और ये अत्यंत निराशा जनक है कि आज़ादी के 72 साल बाद भी लोग सच नहीं जानते | इसका एक राजनीतक कारण है | स्कूलों में इतिहास के नाम पर को उन जिहादी आतंकवादियों के बारे में पढ़ाया जाता है जिन्होंने भारत में कत्लेआम किया, पुस्तकालय जला दिए, प्राचीन संरचना को नष्ट किया, तलवार के ज़ोर पर धर्म परिवर्तन करवाया | दुर्भाग्यपूर्ण है की आज़ादी के बाद ऐसे खलनायकों को कांग्रेस सरकार ने नायक बनाने का प्रयास किया | सवाल उठता है की आखिर ऐसा क्यों किया गया इसका कारण हैं हमारा पहला शिक्षा मंत्री जो भारत के स्वर्णिम इतिहास को मिटा देना चाहता था और वो ऐसा क्यों चाहता था यह मैं आपकी समझदारी पर छोड़ता हूँ उसका नाम था मौलाना अबुल कलाम आज़ाद |

One who ruined our Education System

वास्कोडिगामा जिसके प्रति शायद आपके दिल में सम्मान की भावना हो किन्तु वो एक समुद्री लूटेरे से ज़्यादा कुछ भी नहीं था | लोगों को क़त्ल करना, लूटना यही उसका पेशा था | १४वी और १५वी शताब्दी में यूरोप के दो सबसे ताक़तवर देश थे जिसमें से एक था पुर्तगाल और दूसरा स्पेन | समझिये, वास्कोडिगामा , पुर्तगाल का लुटेरा और स्पेन में कोई तो ज़रूर रहा होगा उसका नाम ?? उसका नाम था क्रिस्टोफर कोलंबस | यँहा बात की गहराई समझने के लिए समय पर ध्यान दें, यूरोप के दो सबसे शक्तिशाली देश एक ही दशक में दुनिया की खोज पर निकलते हैं और 19वि सदी आते-आते सारी दुनिया गुलाम हो जाती है| आश्चर्यजनक ??? यह दोनों देश जो एक दूसरे के दुश्मन नहीं बल्कि प्रतिद्वंद्वी थे | हम सब जानते हैं कि प्रतिस्पर्धा सदैव ही एक लक्ष्य को पहले प्राप्त करने के लिए होती हैं किन्तु यंहा तो एक देश एक पूर्व की ओर गया और दूसरा पश्चिम की ओर कितना सुन्योजित है एकदम योजनाबद्ध???

हमारा इतिहास स्वर्णिम है

१४वी और १५वी सदी के यूरोप का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि पोप को न्यायलय माना जाता था | पोप इनोसेंट VIII की मृत्यु 25 जुलाई 1492 में हुई जिसके बाद अलेक्जेंडर VI, पूर्ण स्पेनिश नाम रोड्रिगो डी बोरजा वाई डम्स था और और इतालवी नाम रॉड्रिगो बोर्गिया था | वह एक सांसारिक रूप से भ्रष्ट और महत्वाकांक्षी व्यक्ति था | जो अगस्त 1492 से अगस्त 1503 तक पोप रहा| कोलंबस ने अपनी यात्रा स्पेन से 3 अगस्त 1492 ( पोप इनोसेंट VIII के मरने क तुरंत बाद) को आरम्भ की और 12 अक्टूबर 1492 को अमेरिका पहुंचा | वंहा उसे मिली माया संस्कृति जिन्हे लोग Red Indians के नाम से जानते हैं| कोलंबस ने वंहा से सोना चांदी लूटा और कत्लेआम किया | क्रिस्टोफर कोलंबस के अपनी पहली यात्रा से 15 मार्च 1493 को लौटने के केवल छह महीने बाद ही कैथोलिक सम्राटों ने उन्हें अपनी दूसरी यात्रा पर भेजा। 24 सितंबर, 1493 को, महासागरीय महासागर का एडमिरल और न्यू स्पेन का वायसराय सातवीं वाहिकाओं के कैडिज़ बंदरगाह से रवाना हुआ।
इसी यात्रा के साथ स्पेन और पुर्तगाल में संपत्ति के विभाजन पर बड़ा विवाद हुआ जिसको पोप एलेग्जेंडर VI ने कुछ इस तरह सुलझाया कि 7 जून, 1494 को पोप अलेक्जेंडर VI ने “टॉरडिलस की संधि” के द्वारा स्पेन को पश्चिमी भाग और पुर्तगाल को पूर्वी भाग देते हुए, दुनिया को दो हिस्से में विभाजित किया।
तत्पश्चात वास्कोडिगामा ने 8 जुलाई 1497 को अपनी यात्रा की शुरू की और 20 मई 1498 को अटलांटिक महासागर के माध्यम से भारत में कालीकट के मालाबार तट पर पंहुचा |

Treaty of Tordesillas

इस लेख का उद्देश्य यह स्पष्ट करना था कि भारत की खोज नहीं की गयी बल्कि योजनाबद्ध तरीके से लूटने के लिए ही वास्कोडिगामा यँहा आया था |
क्या हुआ 20 मई 1498 के बाद…………

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है?
वक्त आने दे बता देंगे तुझे ऐ आस्माँ! हम अभी से क्या बतायें क्या हमारे दिल में है?

जयहिन्द!!


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